लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।
मूल पाठ
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।
निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।
स्रोत अभिलेख 6.18 · पुस्तक पृ. 788, 789
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसने अंगदपर लात उठायी। अंगदने [वही] पैर पकड़कर उसे घुमाकर जमीनपर दे पटका (मार गिराया)। राक्षसके समूह भारी योद्धा देखकर जहाँ-तहाँ [भाग] चले, वे डरके मारे पुकार भी न मचा सके॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 788 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।
English explanation
Ravana’s son raised his foot to kick Angada; Angada seized his foot, swung him around, and dashed him to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस रावण-पुत्र ने | that son of Ravana |
| अंगद | अंगद | Angada, Bali’s son |
| कहुँ | को | at; toward |
| लात | लात मारने को पैर | a foot to kick |
| उठाई | उठाया | raised |
| गहि | पकड़कर | having seized |
| पद | उसका पैर | his foot |
| पटकेउ | पटक दिया | dashed him down |
| भूमि | धरती पर | onto the ground |
| भवाँई | घुमाकर | having swung him around |
2 निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।
English explanation
Seeing that formidable warrior, groups of demons fled in every direction, unable even to cry out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों के | of demons |
| निकर | समूह | groups |
| देखि | देखकर | seeing |
| भट | योद्धा अंगद को | the warrior Angada |
| भारी | अत्यंत प्रबल | formidable |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | तहाँ; इधर-उधर | there; in all directions |
| चले | भाग चले | fled |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते थे | were able |
| पुकारी | पुकारना | to cry out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 788
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 788, 789
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।