लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुके वचन सुनकर वानर तुरंत चले और उन्होंने जाकर राजतिलककी सारी व्यवस्था की। आदरके साथ विभीषणको सिंहासनपर बैठाकर राजतिलक किया और स्तुति की॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 884 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।
सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।
स्रोत अभिलेख 6.106 · पुस्तक पृ. 883, 884
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, the monkeys departed at once and, on arriving, made arrangements for the royal consecration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | at once |
| चले | चल पड़े | departed |
| कपि | वानर | the monkeys |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम के | of Lord Rama |
| बचना | वचन | words |
| कीन्ही | की | made |
| जाइ | जाकर | having gone there |
| तिलक | राजतिलक | royal consecration |
| की | की | for |
| रचना | व्यवस्था | arrangements |
2 सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।
English explanation
They respectfully seated Vibhishana on the throne, completed his royal consecration, and offered fitting praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सिंहासन | सिंहासन पर | on the throne |
| बैठारी | बैठाकर | having seated him |
| तिलक | राजतिलक | royal consecration |
| सारि | संपन्न करके | having completed |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| अनुसारी | यथोचित की | offered fittingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 884
- सहायक विषय
- मन्दोदरी-विलाप, रावणकी अन्त्येष्टि-क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 883, 884
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।