लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।
मूल पाठ
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।
पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।
स्रोत अभिलेख 6.78 · पुस्तक पृ. 848, 848
भावार्थ
मूल पाठ के बादरावणने उनको ज्ञानका उपदेश किया। वह स्वयं तो नीच है, पर उसकी कथा (बातें) शुभ और पवित्र है। दूसरोंको उपदेश देनेमें तो बहुत लोग निपुण होते हैं। पर ऐसे लोग अधिक नहीं हैं जो उपदेशके अनुसार आचरण भी करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 848 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।
English explanation
Ravana instructed them in wisdom. He himself was wicked, though his words were good and purifying.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्हहि | उन लोगों को | to them |
| ग्यान | ज्ञान | wisdom |
| उपदेसा | उपदेश दिया | taught |
| रावन | रावण ने | Ravana, the demon king |
| आपुन | स्वयं | himself |
| मंद | दुष्ट | wicked |
| कथा | कही हुई बातें | spoken words |
| सुभ | शुभ | good |
| पावन | पवित्र करने वाली | purifying |
2 पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।
English explanation
Many are skilled at advising others, but few people practice what they teach.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों को | to others |
| उपदेस | उपदेश देने में | in giving advice |
| कुसल | कुशल | skilled |
| बहुतेरे | बहुत लोग | many people |
| जे | जो लोग | those who |
| आचरहिं | आचरण करते हैं | put it into practice |
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| न | नहीं | not |
| घनेरे | बहुत | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 848
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 848, 848
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।