लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।
मूल पाठ
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।
मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 6.16 · पुस्तक पृ. 786, 787
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मृगनयनी! तेरी बातें बड़ी गूढ़ (रहस्यभरी) हैं, समझनेपर सुख देनेवाली और सुननेसे भय छुड़ानेवाली हैं। मन्दोदरीने मनमें ऐसा निश्चय कर लिया कि पतिको कालवश मतिभ्रम हो गया है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 787 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।
English explanation
O doe-eyed one, your speech is profound: delightful when understood and dispelling fear when heard.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | तुम्हारी | your |
| बतकही | बातचीत | speech |
| गूढ़ | गहरे अर्थ वाली | profound |
| मृगलोचनि | हे मृग जैसे नेत्रों वाली | O doe-eyed woman |
| समुझत | समझने पर | when understood |
| सुखद | सुख देने वाली | giving delight |
| सुनत | सुनने पर | when heard |
| भय | भय को | fear |
| मोचनि | दूर करने वाली | dispelling |
2 मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।
English explanation
Mandodari concluded in her heart that, under the sway of approaching death, her husband’s judgment had become confused.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरि | रावण की पत्नी मंदोदरी | Mandodari, Ravana’s wife |
| मन | मन | heart |
| महुँ | में | in |
| अस | ऐसा | thus |
| ठयऊ | निश्चय किया | concluded |
| पियहि | पति को | her husband |
| काल | काल के | of approaching death |
| बस | वश में | under the sway |
| मतिभ्रम | बुद्धि का भ्रम | confusion of judgment |
| भयऊ | हो गया | had arisen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 787
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 786, 787
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