लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।
मूल पाठ
तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।
बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 6.107 · पुस्तक पृ. 884, 885
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब हनुमान्जी नगरमें आये। यह सुनकर राक्षस-राक्षसी [उनके सत्कारके लिये] दौड़े। उन्होंने बहुत प्रकारसे हनुमान्जीकी पूजा की और फिर श्रीजानकीजीको दिखला दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 885 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।
English explanation
Then Hanuman entered the city of Lanka. Hearing of his arrival, the female and male demons came running.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान | Hanuman |
| नगर | लंका नगर | the city of Lanka |
| महुँ | में | in |
| आए | आए | arrived |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| निसिचरी | राक्षसियाँ | female demons |
| निसाचर | राक्षस | male demons |
| धाए | दौड़े आए | came running |
2 बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।
English explanation
They honored Hanuman in many ways and then showed him Sita, King Janaka’s daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| पूजा | आदर-सत्कार | honor and respectful welcome |
| कीन्ही | किया | performed |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, Janaka’s daughter |
| देखाइ | दिखाकर; दर्शन कराकर | showing; enabling him to see |
| पुनि | फिर | then |
| दीन्ही | कर दिया | did so |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 885
- सहायक विषय
- विभीषणका राज्याभिषेक
- मुद्रित पृष्ठ
- 884, 885
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।