लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।
मूल पाठ
तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।
सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 772, 773
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु आपके शत्रुओंकी स्त्रियोंके आँसुओंकी धारासे यह फिर भर गया और उसीसे खारा भी हो गया। हनुमान्जीकी यह अत्युक्ति (अलङ्कारपूर्ण युक्ति) सुनकर वानर श्रीरघुनाथजीकी ओर देखकर हर्षित हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 772 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।
English explanation
Then streams of tears shed by the enemies’ women filled the ocean again; those tears made it salty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रिपु | शत्रुओं की | the enemies’ |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| रुदन | रोने से निकला | shed in weeping |
| जल | आँसुओं का जल | tear-water |
| धारा | धाराएँ | streams |
| भरेउ | भर गया | was filled |
| बहोरि | फिर | again |
| भयउ | हो गया | became |
| तेहिं | उसी से | because of that |
| खारा | नमकीन | salty |
2 सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।
English explanation
Hearing the wind-god’s son’s striking statement and beholding Rama’s person, the monkeys rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| अति | अत्यंत | very |
| उकुति | उक्ति; कथन | statement |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, the wind-god’s son |
| केरी | की | of |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| कपि | वानर | the monkeys |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम का | Rama’s, lord of Raghu’s lineage |
| तन | तन; शरीर | body; person |
| हेरी | देखकर | having beheld |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 772
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 772, 773
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