लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।
मूल पाठ
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।
पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।
स्रोत अभिलेख 6.65 · पुस्तक पृ. 834, 835
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब हनुमान्जीने उसे एक घूँसा मारा; जिससे वह व्याकुल होकर पृथ्वीपर गिर पड़ा और सिर पीटने लगा। फिर उसने उठकर हनुमान्जीको मारा! वे चक्कर खाकर तुरंत ही पृथ्वीपर गिर पड़े॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 834 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।
English explanation
Then Hanuman, son of the wind god, struck him with his fist. He fell to the ground and beat his head in distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मारुतसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| मुठिका | मुक्का | a fist-blow |
| हन्यो | मारा | struck |
| पर् | गिरने की क्रिया का अंश | stem fragment meaning to fall |
| यो | भूतकालिक क्रिया का अंतिम अंश | past-tense verb ending |
| धरनि | धरती पर | on the ground |
| ब्याकुल | व्याकुल होकर | in distress |
| सिर | सिर | his head |
| धुन्यो | पटका, पीड़ा में झटका | beat or tossed in pain |
2 पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।
English explanation
Then Kumbhakarna rose and struck Hanuman, who immediately fell to the ground, reeling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then; again |
| उठि | उठकर | having risen |
| तेहिं | उसने, कुंभकर्ण ने | he, Kumbhakarna |
| मारेउ | मारा | struck |
| हनुमंता | हनुमान को | Hanuman |
| घुर्मित | चक्कर खाकर | reeling; dizzy |
| भूतल | धरती पर | to the ground |
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| तुरंता | तुरंत | immediately |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.65
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 834
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 834, 835
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।