लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।
मूल पाठ
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।
पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।
स्रोत अभिलेख 6.24 · पुस्तक पृ. 794, 796
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[रावण बोला—] अरे वानर! जब तेरी ऐसी बुद्धि है तभी तो तू बापको खा गया। ऐसा वचन कहकर रावण हँसा। अंगदने कहा—पिताको खाकर फिर तुमको भी खा डालता। परन्तु अभी तुरंत कुछ और ही बात मेरी समझमें आ गयी!॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 795 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।
English explanation
“If you are so wise, why did you devour your father, monkey?” Saying this, ten-headed Ravana laughed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| असि | ऐसी | such |
| मति | बुद्धि | understanding |
| पितु | पिता को | your father |
| खाए | खा गए | you devoured |
| कीसा | हे वानर | O monkey |
| कहि | कहकर | having said |
| अस | ऐसे | such |
| बचन | वचन | words |
| हँसा | हँसा | laughed |
| दससीसा | दस सिर वाला रावण | ten-headed Ravana |
2 पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।
English explanation
Having devoured my father, I would have devoured you too; but just now something has dawned on me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितहि | पिता को ही | my father |
| खाइ | खाकर | having devoured |
| खातेउँ | मैं खा जाता | I would have devoured |
| पुनि | फिर; भी | then; also |
| तोही | तुम्हें भी | you too |
| अबहीं | अभी ही | just now |
| समुझि | समझ में | into understanding |
| परा | आया | came |
| कछु | कुछ | something |
| मोही | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 795
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 794, 796
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