लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।
मूल पाठ
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।
सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।
स्रोत अभिलेख 6.42 · पुस्तक पृ. 813, 814
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं जिसे रणसे पीठ देकर भागा हुआ अपने कानों सुनूँगा, उसे स्वयं भयानक दुधारी तलवारसे मारूँगा। मेरा सब कुछ खाया, भाँति-भाँतिके भोग किये और अब रणभूमिमें प्राण प्यारे हो गये!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 813 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।
English explanation
Whoever I hear has turned away from battle, I shall kill with my terrible sword.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जिस किसी को | whoever |
| रन | युद्ध से | from battle |
| बिमुख | मुँह मोड़ने वाला | turning away |
| सुना | सुनूँ | hear of |
| मैं | मैं, रावण | I, Ravana |
| काना | कानों से | with my ears |
| सो | उसे | that person |
| मैं | मैं | I |
| हतब | मार डालूँगा | shall kill |
| कराल | भयानक | terrible |
| कृपाना | तलवार से | with a sword |
2 सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।
English explanation
After consuming all the wealth and enjoying pleasures of every kind, now on the battlefield your lives have become dear to you!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर्बसु | सारा धन-साधन | all the wealth and resources |
| खाइ | खाकर, उपभोग करके | having consumed |
| भोग | सुख-विलास | pleasures |
| करि | करके | having enjoyed |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| समर | युद्ध की | of battle |
| भूमि | भूमि में | on the field |
| भए | हो गए | have become |
| बल्लभ | प्रिय | dear |
| प्राना | प्राण | your lives |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 813
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 813, 814
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