लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणके उग्र (कठोर) वचन सुनकर सब वीर डर गये और लज्जित होकर क्रोध करके युद्धके लिये लौट चले। रणमें [शत्रुके] सम्मुख (युद्ध करते हुए) मरनेमें ही वीरकी शोभा है। [यह सोचकर] तब उन्होंने प्राणोंका लोभ छोड़ दिया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 814 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।
सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।
स्रोत अभिलेख 6.42 · पुस्तक पृ. 813, 814
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।
English explanation
Hearing the fierce words, all were frightened; ashamed, the warriors set out in anger to fight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उग्र | कठोर, तीखे | fierce |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सकल | सब | all |
| डेराने | डर गए | became frightened |
| चले | चल पड़े | set out |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| करि | करके | rousing |
| सुभट | योद्धा | warriors |
| लजाने | लज्जित हुए | ashamed |
2 सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।
English explanation
To die facing the enemy is a warrior’s glory; then they gave up their attachment to preserving their lives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सन्मुख | शत्रु के सामने | facing the enemy |
| मरन | मरना | dying |
| बीर | वीर की | a warrior |
| कै | की | ’s |
| सोभा | शोभा, गौरव | glory |
| तब | तब | then |
| तिन्ह | उन्होंने | they |
| तजा | त्याग दिया | gave up |
| प्रान | प्राणों | their lives |
| कर | का | for |
| लोभा | मोह, बचाने की लालसा | attachment to preserving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 814
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 813, 814
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