लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।
मूल पाठ
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।
हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।
स्रोत अभिलेख 6.117 · पुस्तक पृ. 897, 898
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसके मनको जो अच्छा लगता है, वह वही ले लेता है। मणियोंको मुँहमें लेकर वानर फिर उन्हें खानेकी चीज न समझकर उगल देते हैं। यह तमाशा देखकर परम विनोदी और कृपाके धाम श्रीरामजी सीताजी और लक्ष्मणजीसहित हँसने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 898 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।
English explanation
They took whatever pleased them. The monkeys put gems into their mouths and then threw them away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोइ | जो भी | whatever |
| जोइ | जो भी | whatever |
| मन | मन को | to their liking |
| भावइ | भाता है | pleases |
| सोइ | वही | that very thing |
| लेहीं | ले लेते हैं | they take |
| मनि | मणियाँ | gems |
| मुख | मुँह में | into their mouths |
| मेलि | डालकर | putting |
| डारि | फेंक | throw away |
| कपि | वानर | the monkeys |
| देहीं | देते हैं | they do |
2 हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।
English explanation
Rama laughed along with Sita and his younger brother Lakshmana—he delights greatly in playful wonders and is the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हँसे | हँस पड़े | laughed |
| रामु | राम | Rama |
| श्री | सीता | Sita, Rama’s consort |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| समेता | सहित | together with |
| परम | अत्यंत | greatly |
| कौतुकी | कौतुकप्रिय | delighting in playful wonders |
| कृपा | कृपा का | of compassion |
| निकेता | धाम | the abode |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 898
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 897, 898
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।