लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।
मूल पाठ
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
स्रोत अभिलेख 6.3 · पुस्तक पृ. 774, 775
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मनुष्य [मेरे स्थापित किये हुए इन] रामेश्वरजीका दर्शन करेंगे, वे शरीर छोड़कर मेरे लोकको जायँगे। और जो गङ्गाजल लाकर इनपर चढ़ावेगा, वह मनुष्य सायुज्य मुक्ति पावेगा (अर्थात् मेरे साथ एक हो जायगा)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 774 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।
English explanation
Those who behold Rameshwar will, upon leaving their bodies, go to my realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| रामेस्वर | राम द्वारा स्थापित शिव, रामेश्वर के | of Rameshwar, Shiva installed by Rama |
| दरसनु | दर्शन | sacred viewing |
| करिहहिं | करेंगे | will perform |
| ते | वे | they |
| तनु | शरीर | the body |
| तजि | छोड़कर | having left |
| मम | मेरे | my |
| लोक | लोक में | to the realm |
| सिधरिहहिं | जाएँगे | will depart |
2 जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
English explanation
The person who brings and offers Ganges water will attain liberation through union with the divine.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| गंगाजलु | गंगा का जल | Ganges water |
| आनि | लाकर | having brought |
| चढ़ाइहि | चढ़ाएगा | will offer |
| सो | वह | that |
| साजुज्य | ईश्वर से एकत्व की | of union with the divine |
| मुक्ति | मुक्ति | liberation |
| नर | मनुष्य | person |
| पाइहि | पाएगा | will attain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 774
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 774, 775
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।