लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।
मूल पाठ
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।
जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।
स्रोत अभिलेख 6.25 · पुस्तक पृ. 796, 796
भावार्थ
मूल पाठ के बाददिग्गज (दिशाओंके हाथी) मेरी छातीकी कठोरताको जानते हैं। जिनके भयानक दाँत, जब- जब जाकर मैं उनसे जबरदस्ती भिड़ा, मेरी छातीमें कभी नहीं फूटे (अपना चिह्न भी नहीं बना सके), बल्कि मेरी छातीसे लगते ही वे मूलीकी तरह टूट गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 796 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।
English explanation
The elephants of the directions know the hardness of my chest whenever I go and forcibly clash with them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानहिं | जानते हैं | know |
| दिग्गज | दिशाओं को धारण करने वाले हाथी | elephants supporting the directions |
| उर | मेरे वक्ष की | of my chest |
| कठिनाई | कठोरता | hardness |
| जब | जब | when |
| जब | जब; दोनों मिलकर जब-जब | when; together, whenever |
| भिरउँ | मैं भिड़ता हूँ | I clash |
| जाइ | जाकर | having gone |
| बरिआई | बलपूर्वक | forcibly |
2 जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।
English explanation
Their fearsome tusks, which otherwise did not break, snapped like radishes on striking my chest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन | whose |
| के | के | of |
| दसन | दाँत, अर्थात हाथी-दाँत | teeth, here tusks |
| कराल | भयानक | fearsome |
| न | नहीं | not |
| फूटे | टूटते थे | would break |
| उर | मेरे वक्ष से | against my chest |
| लागत | लगते ही | upon striking |
| मूलक | मूली | radish |
| इव | के समान | like |
| टूटे | टूट गए | broke |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 796
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 796, 796
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।