लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।
मूल पाठ
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।
दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।
स्रोत अभिलेख 6.5 · पुस्तक पृ. 776, 777
भावार्थ
मूल पाठ के बादघूमते-फिरते जहाँ कहीं किसी राक्षसको पा जाते हैं तो सब उसे घेरकर खूब नाच नचाते हैं और दाँतोंसे उसके नाक-कान काटकर, प्रभुका सुयश कहकर [अथवा कहलाकर] तब उसे जाने देते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 776 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।
English explanation
Wherever they found roaming demons, they all surrounded them and made them dance in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| कहुँ | कहीं | anywhere |
| फिरत | घूमते हुए | roaming |
| निसाचर | राक्षस | demons; night-roamers |
| पावहिं | पाते; मिलते हैं | they find |
| घेरि | घेरकर | having surrounded |
| सकल | सब मिलकर | all together |
| बहु | बहुत; अनेक प्रकार के | many; numerous |
| नाच | नाच | dances |
| नचावहिं | नचाते हैं | make them dance |
2 दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।
English explanation
After biting off their noses and ears, they proclaimed the Lord’s good fame and then let them go.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसनन्हि | दाँतों से | with their teeth |
| काटि | काटकर | having cut off |
| नासिका | नाक | noses |
| काना | कान | ears |
| कहि | कहकर; सुनाकर | proclaiming; recounting |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| सुजसु | सुकीर्ति; उत्तम यश | good fame; glorious renown |
| देहिं | देते हैं; अनुमति देते हैं | they allow |
| तब | फिर | then |
| जाना | जाने | to leave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 776
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका सेनासहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वतपर निवास, रावणकी व्याकुलता
- मुद्रित पृष्ठ
- 776, 777
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।