लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब उसने श्रीरामजीकी निन्दा की, तब तो कपिश्रेष्ठ अंगद अत्यन्त क्रोधित हुए। क्योंकि [शास्त्र ऐसा कहते हैं कि] जो अपने कानोंसे भगवान् विष्णु और शिवकी निन्दा सुनता है, उसे गोवधके समान पाप होता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 802 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।
हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
स्रोत अभिलेख 6.32 · पुस्तक पृ. 802, 803
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।
English explanation
AI-generated interpretation draft: When Ravana disparaged Rama, Angada, the foremost monkey warrior, became extremely angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| तेहिं | उसने, रावण ने | he, Ravana |
| कीन्ह | की | did |
| राम | राम | Rama |
| कै | की | of |
| निंदा | निंदा | disparagement |
| क्रोधवंत | क्रोधित | angry |
| अति | अत्यंत | extremely |
| भयउ | हो गया | became |
| कपिंदा | वानरश्रेष्ठ अंगद | Angada, foremost among monkeys |
2 हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
English explanation
Whoever listens to the disparagement of Vishnu or Shiva incurs a sin equal to killing a cow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| हर | शिव | Shiva |
| निंदा | निंदा | disparagement |
| सुनइ | सुनता है | listens to |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| काना | कानों से | with the ears |
| होइ | होता है, लगता है | is incurred |
| पाप | पाप | sin |
| गोघात | गोहत्या | killing a cow |
| समाना | के समान | equal to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 802
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 802, 803
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।