लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब विरहके मारे हृदयमें दारुण दाह हो गया, तब उनका बायाँ नेत्र और बाहु फड़क उठे। शकुन समझकर उन्होंने मनमें धैर्य धारण किया कि अब कृपालु श्रीरघुवीर अवश्य मिलेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 875 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।
सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 875, 876
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।
English explanation
When the burning of separation in her heart grew intense, Sita’s left eye and arm twitched.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| अति | बहुत तीव्र | very intense |
| भयउ | हो गया | became |
| बिरह | वियोग से उत्पन्न | caused by separation |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दाहू | जलन | burning anguish |
| फरकेउ | फड़का | twitched |
| बाम | बायाँ | left |
| नयन | नेत्र | eye |
| अरु | और | and |
| बाहू | बाँह | arm |
2 सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।
English explanation
Taking this as an auspicious omen, Sita steadied her heart: now she would meet compassionate Rama, the hero of Raghu’s lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुन | शुभ शकुन | auspicious omen |
| बिचारि | विचार करके | considering |
| धरी | धारण किया | held |
| मन | मन में | in her heart |
| धीरा | धीरज | fortitude |
| अब | अब | now |
| मिलिहहिं | मिलेंगे | will meet her |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर श्रीराम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 875
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 875, 876
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