लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस समय तुमलोगोंमेंसे किसीको भूख न थी? [बंदर तो तुम्हारा भोजन ही हैं, फिर] नगर जलाते समय उसे पकड़कर क्यों नहीं खा लिया? इन मन्त्रियोंने स्वामी (आप) को ऐसी सम्मति सुनायी है जो सुननेमें अच्छी है पर जिससे आगे चलकर दु:ख पाना होगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 780 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।
सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।
स्रोत अभिलेख 6.9 · पुस्तक पृ. 780, 780
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।
English explanation
Was none of you hungry then? Why did you not seize and eat him while he was burning the city?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छुधा | भूख | hunger |
| न | नहीं | not |
| रही | थी | was |
| तुम्हहि | तुम्हें; तुम लोगों को | to you |
| तब | उस समय | then |
| काहू | किसी को | any one of you |
| जारत | जलाते समय | while burning |
| नगरु | नगर | the city |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| धरि | पकड़कर | having seized him |
| खाहू | खाया तुमने | did you eat him |
2 सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।
English explanation
The ministers offered their master advice that sounds pleasant but brings suffering later.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनने में | on hearing |
| नीक | अच्छी | pleasant |
| आगें | आगे चलकर | later on |
| दुख | दुःख | suffering |
| पावा | पाना पड़ता है | one comes to suffer |
| सचिवन | मंत्रियों ने | the ministers |
| अस | ऐसी | such |
| मत | सलाह | advice |
| प्रभुहि | स्वामी को, रावण को | to their lord, Ravana |
| सुनावा | सुनाई | presented |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 780
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 780, 780
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