लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमतवाले हाथियोंके बहुत-से झुंड चले। मानो पवनसे प्रेरित हुए वर्षा-ऋतुके बादल हों। रंग-बिरंगे बाना धारण करनेवाले वीरोंके समूह हैं, जो युद्धमें बड़े शूरवीर हैं और बहुत प्रकारकी माया जानते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 849 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।
बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।
स्रोत अभिलेख 6.79 · पुस्तक पृ. 849, 850
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।
English explanation
Numerous herds of elephants in rut advanced like monsoon clouds driven by the wind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | advanced |
| मत्त | मदमस्त | in rut |
| गज | हाथियों के | of elephants |
| जूथ | झुंड | herds |
| घनेरे | बहुत-से | numerous |
| प्राबिट | वर्षाकाल के | of the rainy season |
| जलद | बादल | clouds |
| मरुत | हवा से | by the wind |
| जनु | मानो | as if |
| प्रेरे | प्रेरित या धकेले गए | driven onward |
2 बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।
English explanation
Bands of renowned warriors proclaimed their titles and exploits; they were brave in battle and knew many illusory arts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरन | वर्णन करते हुए | recounting |
| बरद | बिरुद या यशगाथाएँ | titles or celebrated exploits |
| बिरदैत | यशस्वी योद्धा | renowned warriors |
| निकाया | समूह | bands |
| समर | युद्ध में | in battle |
| सूर | वीर | valiant |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| बहु | अनेक | many |
| माया | मायावी उपाय | illusory arts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 849
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 849, 850
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