लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
मूल पाठ
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.79 · पुस्तक पृ. 849, 850
भावार्थ
मूल पाठ के बादअत्यन्त विचित्र फौज शोभित है। मानो वीर वसन्तने सेना सजायी हो। सेनाके चलनेसे दिशाओंके हाथी डिगने लगे, समुद्र क्षुभित हो गये और पर्वत डगमगाने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 849 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
English explanation
The remarkably varied army shone, as though the heroic Spring had arrayed his forces.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिचित्र | विविध और अद्भुत | varied and striking |
| बाहिनी | सेना | army |
| बिराजी | शोभायमान हुई | stood resplendent |
| बीर | वीर | heroic |
| बसंत | वसंत ऋतु ने | Spring |
| सेन | सेना | forces |
| जनु | मानो | as though |
| साजी | सजाई हो | had arrayed |
2 चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।
English explanation
As the army moved, the elephants of the directions shook, the oceans were agitated, and the mountains trembled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत | चलते समय | as it moved |
| कटक | सेना | army |
| दिगसिधुंर | दिशाओं के रक्षक हाथी | guardian elephants of the directions |
| डगहीं | डगने लगे | shook |
| छुभित | क्षुब्ध | agitated |
| पयोधि | समुद्र | oceans |
| कुधर | पर्वत | mountains |
| डगमगहीं | डगमगाने लगे | trembled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 849
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 849, 850
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