लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।
मूल पाठ
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।
पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।
स्रोत अभिलेख 6.79 · पुस्तक पृ. 849, 850
भावार्थ
मूल पाठ के बादइतनी धूल उड़ी कि सूर्य छिप गये। [फिर सहसा] पवन रुक गया और पृथ्वी अकुला उठी। ढोल और नगाड़े भीषण ध्वनिसे बज रहे हैं; जैसे प्रलयकालके बादल गरज रहे हों॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 849 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।
English explanation
Dust rose and hid the sun; the wind grew weary and the earth became distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठी | उठी | rose |
| रेनु | धूल | dust |
| रबि | सूर्य | the sun |
| गयउ | हो गया | became |
| छपाई | छिपा हुआ | hidden |
| मरुत | हवा | the wind |
| थकित | थकी हुई | weary |
| बसुधा | धरती | the earth |
| अकुलाई | व्याकुल हुई | became distressed |
2 पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।
English explanation
Drums and kettledrums sounded with a fearsome roar, like clouds thundering at the world's dissolution.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पनव | एक प्रकार के ढोल | a kind of drum |
| निसान | नगाड़े | kettledrums |
| घोर | भयंकर | fearsome |
| रव | ध्वनि से | with a sound |
| बाजहिं | बजते हैं | resound |
| प्रलय | विश्व के संहार का | of cosmic dissolution |
| समय | समय | time |
| के | के | of |
| घन | बादल | clouds |
| जनु | मानो | as though |
| गाजहिं | गरजते हैं | thunder |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 849
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 849, 850
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।