लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
मूल पाठ
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
स्रोत अभिलेख 6.4 · पुस्तक पृ. 775, 776
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी आज्ञा पाकर सेना चली। वानर-सेनाकी विपुलता (अत्यधिक संख्या) को कौन कह सकता है?॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 776 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
English explanation
Receiving the Lord’s command, the army set out. Who can describe the immensity of the monkey host?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चला | चल पड़ा | set out |
| कटकु | सेना | the army |
| प्रभु | प्रभु राम की | of the Lord Rama |
| आयसु | आज्ञा | command |
| पाई | पाकर | having received |
| को | कौन | who |
| कहि | कह | describe |
| सक | सकता है | can |
| कपि | वानरों की | of monkeys |
| दल | सेना की | of the host |
| बिपुलाई | विशालता | immensity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 776
- सहायक विषय
- नल-नीलद्वारा पुल बाँधना, श्रीरामजीद्वारा श्रीरामेश्वरकी स्थापना
- मुद्रित पृष्ठ
- 775, 776
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।