लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भवानी! श्रीरामजीकी इन सगुण लीलाओंके विषयमें बुद्धि और वाणीके बलसे तर्क (निर्णय) नहीं किया जा सकता। ऐसा विचारकर जो तत्त्वज्ञानी और विरक्त पुरुष हैं वे सब तर्क (शंका) छोड़कर श्रीरामजीका भजन ही करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 843 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।
अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
स्रोत अभिलेख 6.74 · पुस्तक पृ. 843, 844
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।
English explanation
O Bhavani, the deeds of Rama in his manifest, qualified form cannot be fathomed through reasoning, intellectual power, or speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरित | चरित्र; किए हुए कार्य | deeds; acts |
| राम | भगवान राम | Rama, the Lord |
| के | के | of |
| सगुन | सगुण रूप में प्रकट | manifest with attributes |
| भवानी | हे भवानी, पार्वती | O Bhavani, Parvati |
| तर्कि | तर्क करके समझे | fathomed by reasoning |
| न | नहीं | not |
| जाहिं | जा सकते हैं | can be |
| बुद्धि | बुद्धि | intellect |
| बल | बल; सामर्थ्य | power; capacity |
| बानी | वाणी | speech |
2 अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
English explanation
Reflecting thus, those who are knowledgeable and detached worship Rama, abandoning all argument; the reading ‘तग्य’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| जे | जो लोग | those who |
| तग्य | तत्त्व के ज्ञाता; सच्चे स्वरूप को जाननेवाले। | Knowers of the truth or essential reality. |
| बिरागी | विरक्त; आसक्ति से रहित | detached; free from attachment |
| रामहि | राम को ही | Rama himself |
| भजहिं | भजते हैं | worship |
| तर्क | तर्क-वितर्क | reasoning and argument |
| सब | सभी | all |
| त्यागी | छोड़कर | having abandoned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.74
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 843
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 843, 844
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।