लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।
मूल पाठ
गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।
कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।
स्रोत अभिलेख 6.32 · पुस्तक पृ. 802, 803
भावार्थ
मूल पाठ के बादरावण गिरते-गिरते सँभलकर उठा। उसके अत्यन्त सुन्दर मुकुट पृथ्वीपर गिर पड़े। कुछ तो उसने उठाकर अपने सिरोंपर सुधारकर रख लिया और कुछ अंगदने उठाकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके पास फेंक दिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 802 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।
English explanation
Ravana steadied himself as he fell and rose; his very beautiful crowns fell to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरत | गिरते हुए | while falling |
| सँभारि | अपने को सँभालकर | steadying himself |
| उठा | उठ खड़ा हुआ | rose |
| दसकंधर | दस सिरों वाला रावण | Ravana, the ten-headed one |
| भूतल | धरती पर | on the ground |
| परे | गिर पड़े | fell |
| मुकुट | मुकुट | crowns |
| अति | अत्यंत | very |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
2 कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।
English explanation
Ravana picked up some crowns and set them back on his heads; Angada hurled some toward Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछु | कुछ मुकुट | some crowns |
| तेहिं | उसने, रावण ने | he, Ravana |
| लै | लेकर | taking |
| निज | अपने | his own |
| सिरन्हि | सिरों पर | on his heads |
| सँवारे | ठीक से रख लिए | set back in place |
| कछु | कुछ मुकुट | some crowns |
| अंगद | बालि के पुत्र अंगद ने | Angada, Bali’s son |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पास | के पास | toward |
| पबारे | फेंक दिए | hurled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 802
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 802, 803
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