लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।
मूल पाठ
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।
धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।
स्रोत अभिलेख 6.22 · पुस्तक पृ. 792, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बादनाक-कानसे रहित बहिनको देखकर तुमने धर्म विचारकर ही तो क्षमा कर दिया था! तुम्हारी धर्मशीलता जग-जाहिर है। मैं भी बड़ा भाग्यवान् हूँ, जो मैंने तुम्हारा दर्शन पाया?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 792 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।
English explanation
Seeing your sister without her ears and nose, you forgave the offense out of regard for righteousness!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कान | कानों | ears |
| नाक | नाक | nose |
| बिनु | बिना | without |
| भगिनि | बहन; शूर्पणखा | your sister, Shurpanakha |
| निहारी | देखकर | having seen |
| छमा | क्षमा | forgiveness |
| कीन्हि | की | granted |
| तुम्ह | तुमने | you |
| धर्म | धर्म का | righteousness |
| बिचारी | विचार करके | taking into consideration |
2 धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।
English explanation
Your righteousness has become renowned throughout the world; I too am most fortunate to have seen you!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्मसीलता | धर्मपरायणता | righteous character |
| तव | तुम्हारी | your |
| जग | संसार में | in the world |
| जागी | प्रसिद्ध हुई; फैल गई | has become renowned |
| पावा | पाया; प्राप्त किया | obtained; had |
| दरसु | दर्शन; तुम्हें देखने का अवसर | a sight of you; an audience |
| हमहुँ | मैं भी | I too |
| बड़भागी | बहुत भाग्यवान | most fortunate |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 792
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 792, 792
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