लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।
मूल पाठ
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।
देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।
स्रोत अभिलेख 6.22 · पुस्तक पृ. 792, 792
भावार्थ
मूल पाठ के बादअंगदने कहा—तुम्हारी धर्मशीलता मैंने भी सुनी है। [वह यह कि] तुमने परायी स्त्रीकी चोरी की है! और दूतकी रक्षाकी बात तो अपनी आँखोंसे देख ली। ऐसे धर्मके व्रतको धारण (पालन) करनेवाले तुम डूबकर मर नहीं जाते!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 792 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।
English explanation
Angada says: I too have heard of your righteousness—you abducted another man's wife!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहते हैं | says |
| कपि | वानर अंगद | the monkey Angada |
| धर्मसीलता | धर्मपरायणता | righteous character |
| तोरी | तुम्हारी | your |
| हमहुँ | मैंने भी | I too |
| सुनी | सुनी है | have heard of |
| कृत | किया हुआ; तुम्हारे द्वारा किया गया | done; committed by you |
| पर | दूसरे की | another man's |
| त्रिय | स्त्री; यहाँ पत्नी | woman; here, wife |
| चोरी | चोरी; हरण | stealing; abduction |
2 देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।
English explanation
I have seen with my own eyes how you protect a messenger. O keeper of religious vows, why do you not drown yourself in shame?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखी | देखी है | have seen |
| नयन | अपनी आँखों से | with my own eyes |
| दूत | दूत की | of a messenger |
| रखवारी | रक्षा; देखभाल | protection; safeguarding |
| बूड़ि | डूबकर | by drowning |
| न | नहीं; क्यों नहीं | not; why not |
| मरहु | तुम मरते हो | you die |
| धर्म | धर्म का | of righteousness |
| ब्रतधारी | व्रत धारण करने वाले | O keeper of vows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 792
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 792, 792
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।