लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।
मूल पाठ
काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।
मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।
स्रोत अभिलेख 6.102 · पुस्तक पृ. 878, 879
भावार्थ
मूल पाठ के बादकाटते ही सिरोंका समूह बढ़ जाता है जैसे प्रत्येक लाभपर लोभ बढ़ता है। शत्रु मरता नहीं और परिश्रम बहुत हुआ। तब श्रीरामचन्द्रजीने विभीषणकी ओर देखा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 878 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।
English explanation
As they are cut off, the clusters of heads keep increasing, just as greed grows with each gain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काटत | काटने पर | as they are cut off |
| बढ़हिं | बढ़ते हैं | increase |
| सीस | सिर | heads |
| समुदाई | समूह | clusters |
| जिमि | जैसे | just as |
| प्रति | प्रत्येक | each |
| लाभ | लाभ के साथ | with a gain |
| लोभ | लालच | greed |
| अधिकाई | बढ़ता है | grows greater |
2 मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।
English explanation
The enemy would not die, and the exertion became great. Then Rama looked toward Vibhishana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरइ | मरता है | dies |
| न | नहीं | not |
| रिपु | शत्रु रावण | the enemy, Ravana |
| श्रम | परिश्रम; थकान | exertion; fatigue |
| भयउ | हो गया | became |
| बिसेषा | बहुत अधिक | especially great |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| बिभीषन | रावण के भाई विभीषण की | Vibhishana, Ravana’s brother |
| तन | ओर | toward |
| तब | तब | then |
| देखा | देखा | looked |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 878
- सहायक विषय
- राम-रावण-युद्ध, रावण-वध, सर्वत्र जयध्वनि
- मुद्रित पृष्ठ
- 878, 879
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।