लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुने [उनसे] हँसकर कहा—मनमें डरो नहीं। ये न उल्का हैं, न वज्र हैं और न केतु या राहु ही हैं। अरे भाई! ये तो रावणके मुकुट हैं; जो बालिपुत्र अंगदके फेंके हुए आ रहे हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 802 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।
ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।
स्रोत अभिलेख 6.32 · पुस्तक पृ. 802, 803
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।
English explanation
Lord Rama laughed and said, ‘Do not be afraid at heart; these are neither meteors nor thunderbolts, neither Ketu nor Rahu.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| हँसि | हँसकर | laughing |
| जनि | मत | do not |
| हृदयँ | हृदय में | in your heart |
| डेराहू | डरो | be afraid |
| लूक | उल्काएँ | meteors |
| न | नहीं | not |
| असनि | वज्र | thunderbolts |
| केतु | केतु, आकाशीय ग्रह-सत्ता | Ketu, the celestial entity |
| नहिं | नहीं | not |
| राहू | राहु, ग्रहण से संबद्ध ग्रह-सत्ता | Rahu, the celestial entity associated with eclipses |
2 ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।
English explanation
‘These are Ravana’s crowns, coming here after being hurled by Angada, Bali’s son.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये | these |
| किरीट | मुकुट | crowns |
| दसकंधर | दस सिरों वाले रावण | ten-headed Ravana |
| केरे | के | belonging to |
| आवत | आ रहे हैं | are coming |
| बालितनय | बालि के पुत्र अंगद | Angada, Bali’s son |
| के | के द्वारा | by |
| प्रेरे | फेंके हुए | hurled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 802
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 802, 803
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।