लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअंगदने कहा—तुम्हारी सच्ची गुणग्राहकता तो मुझे हनुमान्ने सुनायी थी। उसने अशोकवनको विध्वंस (तहस-नहस) करके, तुम्हारे पुत्रको मारकर नगरको जला दिया था। तो भी [तुमने अपनी गुणग्राहकताके कारण यही समझा कि] उसने तुम्हारा कुछ भी अपकार नहीं किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 795 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।
बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।
स्रोत अभिलेख 6.24 · पुस्तक पृ. 794, 796
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।
English explanation
Angada said: The son of the Wind truly told me of your appreciation of merit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| कपि | वानर अंगद | the monkey Angada |
| तव | तुम्हारी | your |
| गुन | गुणों की | of merit |
| गाहकताई | कदर करने की प्रवृत्ति | appreciation |
| सत्य | सच ही | truly |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान ने | Hanuman, son of the Wind |
| मोहि | मुझे | to me |
| सुनाई | बताई | related |
2 बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।
English explanation
He devastated the grove, killed your son, and burned the city; yet you did him no harm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन; अशोक वाटिका | the grove; Ashoka garden |
| बिधंसि | उजाड़कर | having devastated |
| सुत | तुम्हारे पुत्र को | your son |
| बधि | मारकर | having killed |
| पुर | नगर को | the city |
| जारा | जला दिया | burned |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| न | नहीं | not |
| तेहिं | उसका; हनुमान का | to him; to Hanuman |
| कछु | कुछ भी | any |
| कृत | किया | done |
| अपकारा | हानि; अहित | harm |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 795
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 794, 796
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।