लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।
मूल पाठ
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।
मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।
स्रोत अभिलेख 6.24 · पुस्तक पृ. 794, 796
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे अंगद! तेरी जाति स्वामिभक्त है। [फिर भला] तू अपने मालिकके गुण इस प्रकार कैसे न बखानेगा? मैं गुणग्राहक (गुणोंका आदर करनेवाला) और परम सुजान (समझदार) हूँ, इसीसे तेरी जली-कटी बक-बकपर कान (ध्यान) नहीं देता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 794 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।
English explanation
Angada, your kind is devoted to its master; why would you not praise your master's qualities in this way?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | हे अंगद, बालि के पुत्र | Angada, son of Bali |
| स्वामिभक्त | स्वामी के प्रति भक्त | devoted to its master |
| तव | तुम्हारी | your |
| जाती | जाति; वानर समुदाय | kind; monkey community |
| प्रभु | स्वामी के | the master's |
| गुन | गुण | qualities |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| कहसि | तुम कहते हो | would you speak |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | way |
2 मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।
English explanation
I am a discerning appreciator of merit, exceedingly wise; I pay no heed to your bitter repetition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| गुन | गुणों का | of merit |
| गाहक | पारखी; कदर करने वाला | discerning appreciator |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुजाना | समझदार | wise |
| तव | तुम्हारी | your |
| कटु | कड़वी | bitter |
| रटनि | बार-बार कही बात | repeated talk |
| करउँ | मैं करता हूँ; देता हूँ | I give |
| नहिं | नहीं | not |
| काना | कान; ध्यान | ear; attention |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 794
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 794, 796
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।