लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअंगदने कहा—अरे रावण! तेरे समान लज्जावान् जगत्में कोई नहीं है। लज्जाशीलता तो तेरा सहज स्वभाव ही है। तू अपने मुँहसे अपने गुण कभी नहीं कहता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 799 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।
लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।
स्रोत अभिलेख 6.29 · पुस्तक पृ. 799, 800
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।
English explanation
Angada said sarcastically, ‘Ravana, no one in the world is as modest as you!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| अंगद | अंगद ने, बालि के पुत्र ने | Angada, Bali’s son |
| सलज्ज | लज्जाशील | modest |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| रावन | हे रावण | Ravana, king of Lanka |
| तोहि | तेरे | you |
| समान | समान | like |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।
English explanation
‘You are modest by your very nature; you never praise your own virtues with your own mouth!’ This too is sarcastic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लाजवंत | लज्जाशील | modest |
| तव | तेरा | your |
| सहज | जन्मजात | innate |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| निज | अपने | your own |
| मुख | मुख से | with your mouth |
| निज | अपने | your own |
| गुन | गुण | virtues |
| कहसि | तू कहता है | you proclaim |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 799
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 799, 800
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