लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।
मूल पाठ
करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।
नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।
स्रोत अभिलेख 6.116 · पुस्तक पृ. 896, 896
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब शिवजी विनती करके चले गये, तब विभीषणजी प्रभुके पास आये और चरणोंमें सिर नवाकर कोमल वाणीसे बोले—हे शाङ्र्गधनुषके धारण करनेवाले प्रभो! मेरी विनती सुनिये—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 896 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।
English explanation
When Shiva departed after offering his prayer, Vibhishana approached Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| बिनती | विनती | a prayer |
| जब | जब | when |
| संभु | शंभु, शिव | Shiva |
| सिधाए | चले गए | departed |
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| निकट | के पास | near |
| बिभीषनु | विभीषण, रावण के भाई | Vibhishana, Ravana’s brother |
| आए | आए | came |
2 नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।
English explanation
Bowing his head at the Lord’s feet, Vibhishana speaks gently: Lord who bears the Sharnga bow, please hear my request.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | his head |
| कह | कहते हैं | says |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in speech |
| बिनय | विनती | my request |
| सुनहु | सुनिए | please hear |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| सारँगपानी | शार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले | bearer of the Sharnga bow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 896
- सहायक विषय
- विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 896, 896
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।