लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।
मूल पाठ
कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।
सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।
स्रोत अभिलेख 6.14 · पुस्तक पृ. 785, 785
भावार्थ
मूल पाठ के बादन भूकम्प हुआ, न बहुत जोरकी हवा (आँधी) चली। न कोई अस्त्र-शस्त्र ही नेत्रोंसे देखे। [फिर ये छत्र, मुकुट और कर्णफूल कैसे कटकर गिर पड़े?] सभी अपने-अपने हृदयमें सोच रहे हैं कि यह बड़ा भयङ्कर अपशकुन हुआ!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 785 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The earth did not tremble, nor did any unusually strong wind blow; no weapon was seen by the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंप | कंपन; काँपना | trembling |
| न | नहीं | not |
| भूमि | धरती | the earth |
| न | न ही | nor |
| मरुत | हवा | wind |
| बिसेषा | विशेष; असाधारण तेज | unusual; unusually strong |
| अस्त्र | दूर से चलाए जाने वाले हथियार | missile weapons |
| सस्त्र | हाथ से चलाए जाने वाले हथियार | hand-held weapons |
| कछु | कोई भी | any |
| नयन | आँखों ने | the eyes |
| न | नहीं | not |
| देखा | देखा | saw |
2 सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।
English explanation
Everyone thought within their own hearts that a very dreadful ill omen had occurred.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोचहिं | सोचते हैं | think |
| सब | सभी | everyone |
| निज | अपने | their own |
| हृदय | हृदय; मन | hearts; minds |
| मझारी | के भीतर | within |
| असगुन | अपशकुन | ill omen |
| भयउ | हुआ | occurred |
| भयंकर | डरावना | terrifying |
| भारी | बहुत बड़ा; अत्यंत | grave; exceedingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 785
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 785
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।