लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।
मूल पाठ
एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।
मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।
स्रोत अभिलेख 6.33 · पुस्तक पृ. 803, 804
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[रावण फिर बोला—] इसे मारकर सब योद्धा तुरंत दौड़ो और जहाँ-कहीं रीछ-वानरोंको पाओ, वहीं खा डालो। पृथ्वीको बंदरोंसे रहित कर दो और जाकर दोनों तपस्वी भाइयों (राम- लक्ष्मण) को जीते-जी पकड़ लो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 803 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।
English explanation
AI draft: In this way, all you valiant warriors, rush forth quickly; devour bears and monkeys wherever you find them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in this manner |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| सूभट | वीर योद्धाओ | valiant warriors |
| सब | सब | all |
| धावहु | दौड़ पड़ो | rush forth |
| खाहु | खा जाओ | devour |
| भालु | भालुओं को | bears |
| कपि | वानरों को | monkeys |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| जहँ | जहाँ भी | in every place |
| पावहु | पाओ | you find |
2 मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।
English explanation
Go and rid the earth of monkeys, and capture the two ascetic brothers alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मर्कटहीन | वानरों से रहित | devoid of monkeys |
| करहु | कर दो | make |
| महि | पृथ्वी को | the earth |
| जाई | जाकर | having gone |
| जिअत | जीवित | alive |
| धरहु | पकड़ लो | capture |
| तापस | तपस्वी | ascetic |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाइयों को | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 803
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 803, 804
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।