लङ्काकाण्ड · दोहा 32 (ख) · दोहा/सोरठा
उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.32 · पुस्तक पृ. 802, 803
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
उधर क्रोधित रावण तैश में सब से कह रहा था।
English explanation
Meanwhile, the enraged Ravana was speaking angrily to everyone there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उहाँ | उधर | there, meanwhile |
| सकोपि | क्रोध सहित | in anger |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-faced one |
| सब | सब लोगों | everyone |
| सन | से | to |
| कहत | कह रहा था | was saying |
| रिसाइ | तैश में आकर | furiously |
2 धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।
‘इस वानर को पकड़ो और पकड़कर मार डालो!’ यह सुनकर अंगद मुसकराए।
English explanation
‘Seize this monkey and kill him!’ Hearing this, Angada smiled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरहु | पकड़ो | seize |
| कपिहि | वानर को, अंगद को | the monkey, Angada |
| धरि | पकड़कर | having seized him |
| मारहु | मार डालो | kill him |
| सुनि | सुनकर | hearing this |
| अंगद | बालि के पुत्र अंगद | Angada, Bali’s son |
| मुसुकाइ | मुसकराए | smiled |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 32 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 6.32
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 802, 803
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