लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।
मूल पाठ
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।
कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।
स्रोत अभिलेख 6.24 · पुस्तक पृ. 794, 796
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर एक रावणको सहस्रबाहुने देखा, और उसने दौड़कर उसको एक विशेष प्रकारके (विचित्र) जन्तुकी तरह [समझकर] पकड़ लिया। तमाशेके लिये वह उसे घर ले आया। तब पुलस्त्य मुनिने जाकर उसे छुड़ाया॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 795 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।
English explanation
Then the thousand-armed king saw one Ravana and rushed to seize him as though he were some unusual creature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक रावण को | one Ravana |
| बहोरि | फिर | then; again |
| सहसभुज | सहस्रबाहु राजा ने | the thousand-armed king |
| देखा | देखा | saw |
| धाइ | दौड़कर | rushing |
| धरा | पकड़ लिया | seized |
| जिमि | जैसे | as though |
| जंतु | जीव | creature |
| बिसेषा | अनोखा | unusual |
2 कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।
English explanation
He brought him home for amusement; the sage Pulasti went and secured his release.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | कौतुक; मनोरंजन | amusement; curiosity |
| लागि | के लिए | for |
| भवन | अपने भवन में | to his residence |
| लै | लेकर | taking |
| आवा | आया | came |
| सो | उसे | him |
| पुलस्ति | पुलस्ति; रावण के पितामह | Pulasti, Ravana's grandfather |
| मुनि | ऋषि ने | the sage |
| जाइ | जाकर | having gone |
| छोड़ावा | छुड़वाया | had released |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 795
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 794, 796
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