लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयहाँ (सुबेल पर्वतपर) प्रात:काल श्रीरघुनाथजी जागे और उन्होंने सब मन्त्रियोंको बुलाकर सलाह पूछी कि शीघ्र बताइये, अब क्या उपाय करना चाहिये? जाम्बवान्ने श्रीरामजीके चरणोंमें सिर नवाकर कहा—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 787 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।
कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।
स्रोत अभिलेख 6.17 · पुस्तक पृ. 787, 788
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।
English explanation
AI draft: Here, Rama awoke in the morning and summoned all his advisers to ask their counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर | here |
| प्रात | प्रातःकाल | in the morning |
| जागे | जागे | awoke |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| पूछा | पूछी | asked |
| मत | राय | counsel |
| सब | सभी | all |
| सचिव | मंत्रियों को | advisers |
| बोलाई | बुलाकर | having summoned |
2 कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।
English explanation
Tell me quickly what course should be taken. Jambavan bowed his head at Rama’s feet and spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताओ | tell me |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| का | कौन-सा | what |
| करिअ | किया जाए | should be undertaken |
| उपाई | उपाय | course of action |
| जामवंत | जामवंत, रीछों के प्रमुख | Jambavan, chief of the bears |
| कह | कहते हैं | says |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 787
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 787, 788
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।