लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।
मूल पाठ
अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।
राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।
स्रोत अभिलेख 6.1 · पुस्तक पृ. 875, 876
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर और सीताजीको बहुत प्रकारसे समझाकर फिर त्रिजटा अपने घर चली गयी। श्रीरामचन्द्रजीके स्वभावका स्मरण करके जानकीजीको अत्यन्त विरहव्यथा उत्पन्न हुई॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 875 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।
English explanation
AI draft: Having said this, Trijata reassured Sita in many ways, then went to her own dwelling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| बहुत | बहुत | many |
| भाँति | प्रकारों से | in ways |
| समुझाई | समझाया; ढाढ़स बँधाया | reassured |
| पुनि | फिर | then |
| त्रिजटा | सीता की सहायक राक्षसी त्रिजटा | Trijata, the rakshasi who supports Sita |
| निज | अपने | her own |
| भवन | घर | dwelling |
| सिधाई | चली गई | departed |
2 राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।
English explanation
As Sita recalled Rama’s nature, intense anguish of separation arose within her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| सुमिरि | स्मरण करके | recalling |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose |
| बिरह | वियोग की | of separation |
| बिथा | पीड़ा | anguish |
| अति | अत्यधिक | intense |
| तेही | उनमें, सीता में | in her, Sita |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 875
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 875, 876
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।