लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।
मूल पाठ
अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।
मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।
स्रोत अभिलेख 6.57 · पुस्तक पृ. 826, 827
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह मन-ही-मन ऐसा कहकर चला और उसने मार्गमें माया रची। तालाब, मन्दिर और सुन्दर बाग बनाया। हनुमान्जीने सुन्दर आश्रम देखकर सोचा कि मुनिसे पूछकर जल पी लूँ, जिससे थकावट दूर हो जाय॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 826 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।
English explanation
AI draft: Saying this, Kalanemi departed and created an illusion along the route: a pond, a shrine, and a beautiful garden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चला | चल पड़ा | departed |
| रचिसि | उसने रची | he created |
| मग | मार्ग में | along the route |
| माया | मायावी रचना | an illusory creation |
| सर | तालाब | a pond |
| मंदिर | मंदिर | a shrine |
| बर | सुंदर | beautiful |
| बाग | बगीचा | a garden |
| बनाया | बनाया | made |
2 मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।
English explanation
Hanuman saw the lovely hermitage and thought, “Let me ask the sage and drink some water, so that my fatigue may pass.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मारुतसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| देखा | देखा | saw |
| सुभ | सुंदर | lovely |
| आश्रम | ऋषि का निवास | a hermitage |
| मुनिहि | मुनि से | the sage |
| बूझि | पूछकर | having asked |
| जल | पानी | water |
| पियौं | मैं पी लूँ | let me drink |
| जाइ | दूर हो जाए | may go away |
| श्रम | थकान | fatigue |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 826
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सुषेण वैद्यको लाना एवं संजीवनीके लिये जाना, कालनेमि-रावण-संवाद, मकरी-उद्धार, कालनेमि-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 826, 827
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।