लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।
मूल पाठ
अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।
स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 850, 851
भावार्थ
मूल पाठ के बादनिर्मल (पापरहित) और अचल (स्थिर) मन तरकसके समान है। शम (मनका वशमें होना), [अहिंसादि] यम और [शौचादि] नियम—ये बहुत-से बाण हैं। ब्राह्मणों और गुरुका पूजन अभेद्य कवच है। इसके समान विजयका दूसरा उपाय नहीं है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 851 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।
English explanation
A pure, steady mind is like a quiver; mental restraint, ethical restraints, and disciplined observances are its many arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमल | निर्मल | pure; untainted |
| अचल | स्थिर | steady; unwavering |
| मन | मन | mind |
| त्रोन | तरकश | quiver |
| समाना | के समान | like; comparable to |
| सम | मन का संयम; शम | mental restraint; tranquility |
| जम | यम; नैतिक संयम | ethical restraints |
| नियम | अनुशासित आचरण के नियम | disciplined observances |
| सिलीमुख | बाण | arrows |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
2 कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।
English explanation
Reverence for Brahmins and the teacher is impenetrable armor. There is no other means of victory equal to this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवच | कवच | armor |
| अभेद | जिसे भेदा न जा सके | impenetrable |
| बिप्र | ब्राह्मणों का | of Brahmins |
| गुर | गुरु का | of the teacher |
| पूजा | पूजन; आदर | worship; reverence |
| एहि | इसके | to this |
| सम | समान | equal |
| बिजय | विजय का | of victory |
| उपाय | साधन | means |
| न | नहीं | not; no |
| दूजा | दूसरा | another |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 851
- सहायक विषय
- रावणका युद्धके लिये प्रस्थान और श्रीरामजीका विजय-रथ तथा वानर-राक्षसोंका युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 850, 851
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।