लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।
मूल पाठ
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।
तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 6.108 · पुस्तक पृ. 885, 886
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! अब तुम वही उपाय करो जिससे मैं इन नेत्रोंसे प्रभुके कोमल श्याम शरीरके दर्शन करूँ। तब श्रीरामचन्द्रजीके पास जाकर हनुमान्जीने जानकीजीका कुशल-समाचार सुनाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 885 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।
English explanation
Now, dear one, make such arrangements that I may see Rama’s dark, tender form with my own eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सोइ | वही; ऐसा ही | that very; such |
| जतन | उपाय | arrangement; means |
| करहु | करो | make; undertake |
| तुम्ह | तुम | you |
| ताता | हे तात, प्रिय पुत्रवत् जन | dear one |
| देखौं | मैं देख सकूँ | that I may see |
| नयन | अपनी आँखों से | with my eyes |
| स्याम | श्याम वर्ण का | dark-hued |
| मृदु | कोमल | tender |
| गाता | शरीर | body; form |
2 तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।
English explanation
Then Hanuman went to Rama and reported the well-being of Sita, Janaka’s daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमान | हनुमान, राम के सेवक | Hanuman, Rama’s devotee and servant |
| राम | राम के | Rama |
| पहिं | पास | to; near |
| जाई | जाकर | having gone |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, Janaka’s daughter |
| कै | की | of |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| सुनाई | बताई | reported |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 885
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका सीताजीको कुशल सुनाना, सीताजीका आगमन और अग्नि-परीक्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 885, 886
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।