लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।
मूल पाठ
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।
बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।
स्रोत अभिलेख 6.18 · पुस्तक पृ. 788, 789
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब अत्यन्त भयभीत होकर विचार करने लगे कि विधाता अब न जाने क्या करेगा। वे बिना पूछे ही अंगदको [रावणके दरबारकी] राह बता देते हैं। जिसे ही वे देखते हैं वही डरके मारे सूख जाता है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 789 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।
English explanation
Everyone, deeply frightened, wondered: ‘What will the Creator do now?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| धौं | भला; आखिर | indeed; I wonder |
| कहा | क्या | what |
| करिहि | करेगा | will do |
| करतारा | विधाता | the Creator; ordainer |
| अति | अत्यंत | extremely |
| सभीत | भयभीत | frightened |
| सब | सब लोग | everyone |
| करहिं | करते थे | were engaged in |
| बिचारा | विचार | anxious reflection |
2 बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।
English explanation
People showed Angada the way without being asked; whoever he looked at withered with fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| पूछें | पूछे जाने के | being asked |
| मगु | रास्ता | the way |
| देहिं | देते थे | would give; would provide |
| दिखाई | दिखा | showing |
| जेहि | जिसको | whomever |
| बिलोक | अंगद देखते | Angada looked at |
| सोइ | वही | that very person |
| जाइ | हो जाता | would become |
| सुखाई | भय से सूखा हुआ | withered with fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 789
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 788, 789
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।