लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।
मूल पाठ
अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।
देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।
स्रोत अभिलेख 6.116 · पुस्तक पृ. 896, 896
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब हे प्रभु! इस दासके घरको पवित्र कीजिये और वहाँ चलकर स्नान कीजिये, जिससे युद्धकी थकावट दूर हो जाय। हे कृपालु! खजाना, महल और सम्पत्तिका निरीक्षण कर प्रसन्नतापूर्वक वानरोंको दीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 896 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।
English explanation
Lord, now sanctify your servant’s home. Please bathe, so that the fatigue of battle may fade.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| जन | अपने सेवक का | your servant’s |
| गृह | घर | home |
| पुनीत | पवित्र | holy |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| कीजे | कीजिए | please make |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| करिअ | कीजिए | please perform |
| समर | युद्ध की | of battle |
| श्रम | थकान | fatigue |
| छीजे | दूर हो जाए | may diminish |
2 देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।
English explanation
Compassionate Lord, look upon the treasury, palaces, and wealth, and give joy to the monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| कोस | कोष, खजाना | treasury |
| मंदिर | महल | palaces |
| संपदा | संपत्ति | wealth |
| देहु | दीजिए | please give |
| कृपाल | हे कृपालु | O compassionate Lord |
| कपिन्ह | वानरों | the monkeys |
| कहुँ | को | to |
| मुदा | आनंद | joy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 896
- सहायक विषय
- विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 896, 896
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।