लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! मुझे सब प्रकारसे अपना लीजिये और फिर हे प्रभो! मुझे साथ लेकर अयोध्यापुरीको पधारिये। विभीषणजीके कोमल वचन सुनते ही दीनदयालु प्रभुके दोनों विशाल नेत्रोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल भर आया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 896 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।
सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
स्रोत अभिलेख 6.116 · पुस्तक पृ. 896, 896
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।
English explanation
Lord, accept me as your own in every way; then go to Ayodhya with me accompanying you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in way |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| मोहि | मुझे | me |
| अपनाइअ | अपना स्वीकार कीजिए | please accept as your own |
| पुनि | फिर | then |
| मोहि | मुझ | me |
| सहित | साथ लेकर | together with |
| अवधपुर | अयोध्या नगर | the city of Ayodhya |
| जाइअ | जाइए | please go |
2 सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
English explanation
On hearing these gentle words, Rama, compassionate toward the lowly, found both his large eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल | gentle |
| दीनदयाला | दीनों पर दया करने वाले राम | Rama, compassionate toward the lowly |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| भए | हो गए | became |
| द्वौ | दोनों | both |
| नयन | नेत्र | eyes |
| बिसाला | विशाल | large |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 896
- सहायक विषय
- विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 896, 896
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।