लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दक्षण भरके लिये वह अदृश्य हो गया। फिर उस दुष्टने अनेकों रूप प्रकट किये। श्रीरघुनाथजीकी सेनामें जितने रीछ-वानर थे, उतने ही रावण जहाँ-तहाँ (चारों ओर) प्रकट हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 869 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
स्रोत अभिलेख 6.96 · पुस्तक पृ. 869, 870
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
English explanation
AI-generated meaning draft: Ravana disappeared for a moment; then the villain appeared in numerous forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतरधान | अदृश्य | invisible |
| भयउ | हो गया | became |
| छन | क्षण | moment |
| एका | एक | one |
| पुनि | फिर | then again |
| प्रगटे | प्रकट हुए | appeared |
| खल | दुष्ट रावण | the villain Ravana |
| रूप | रूप | forms |
| अनेका | अनेक | numerous |
2 रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
English explanation
As many bears and monkeys as there were in Rama’s army, that many Ravanas appeared throughout the battlefield.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| कटक | सेना | army |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| जेते | जितने | as many as |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| प्रगट | प्रकट हुए | appeared |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-faced one |
| तेते | उतने ही | that many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 869
- सहायक विषय
- रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
- मुद्रित पृष्ठ
- 869, 870
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।