बालकाण्ड · सोरठा 2 · सोरठा
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
मूल पाठ
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥२॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी कृपासे गूँगा बहुत सुन्दर बोलनेवाला हो जाता है और लँगड़ा-लूला दुर्गम पहाड़पर चढ़ जाता है, वे कलियुगके सब पापोंको जला डालनेवाले दयालु (भगवान्) मुझपर द्रवित हों (दया करें),॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 18 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
English explanation
The mute becomes eloquent, and the lame climbs a great, inaccessible mountain—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मूक | बोल न सकने वाला | a mute person |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| बाचाल | वाक्पटु | eloquent |
| पंगु | लँगड़ा व्यक्ति | a lame person |
| चढ़इ | चढ़ जाता है | climbs |
| गिरिबर | विशाल पर्वत | a great mountain |
| गहन | दुर्गम | inaccessible |
2जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन॥२॥
English explanation
May that compassionate Lord, by whose grace this happens and who burns away all impurities of the age of Kali, be moved to mercy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनकी | whose |
| कृपाँ | कृपा से | by grace |
| सो | वे | that one |
| दयाल | दयालु प्रभु | compassionate Lord |
| द्रवउ | करुणा से द्रवित हों | may he be moved to mercy |
| सकल | समस्त | all |
| कलि | कलियुग के | of the age of Kali |
| मल | पाप और अशुद्धियाँ | sins and impurities |
| दहन | जलाने वाले | the one who burns away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 2
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 18
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।