बालकाण्ड · सोरठा 3 · सोरठा
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।
नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।
करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन।
जो नीले कमल के समान श्याम हैं और जिनके नेत्र नए खिले लाल कमल जैसे हैं—
English explanation
He who is dark like a blue lotus and whose eyes resemble freshly blossomed red lotuses—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नील | नीला | blue |
| सरोरुह | कमल | lotus |
| स्याम | श्यामवर्ण | dark-complexioned |
| तरुन | नवखिला | freshly blossomed |
| अरुन | लाल | red |
| बारिज | कमल | lotus |
| नयन | नेत्र | eyes |
2करउ सो मम उर धाम सदा छीरसागर सयन॥३॥
वे क्षीरसागर में शयन करने वाले प्रभु सदा मेरे हृदय को अपना निवास बनाएँ।
English explanation
May that Lord who reclines in the ocean of milk always make my heart his abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करउ | बनाएँ | may he make |
| सो | वे | that Lord |
| मम | मेरा | my |
| उर | हृदय | heart |
| धाम | निवासस्थान | abode |
| सदा | सदा | always |
| छीरसागर | दूध के समुद्र में | in the ocean of milk |
| सयन | शयन करने वाले | the one who reclines |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 3
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
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