बालकाण्ड · सोरठा 184 · सोरठा
धरनि धरहि मन धीर कह बिरंचि हरि पद सुमिरु।
धरनि धरहि मन धीर कह बिरंचि हरि पद सुमिरु।
जानत जन की पीर प्रभु भंजिहि दारुन बिपति॥ १८४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.184 · पुस्तक पृ. 184, 185
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1धरनि धरहि मन धीर कह बिरंचि हरि पद सुमिरु।
एआई प्रारूप: ब्रह्मा ने कहा, ‘हे पृथ्वी, मन में धीरज रखो और हरि के चरणों का स्मरण करो।’
English explanation
AI draft: Brahma said, ‘O Earth, keep courage in your heart and remember Hari’s feet.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरनि | हे पृथ्वी | O Earth |
| धरहि | धारण करो; रखो | hold; maintain |
| मन | मन में | in your heart |
| धीर | धीरज | courage; patience |
| कह | कहा | said |
| बिरंचि | ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| हरि | भगवान हरि के | of Hari, the Lord |
| पद | चरण | feet |
| सुमिरु | स्मरण करो | remember |
2जानत जन की पीर प्रभु भंजिहि दारुन बिपति॥ १८४॥
एआई प्रारूप: प्रभु अपने सेवक की पीड़ा जानते हैं; वे इस भयंकर विपत्ति को दूर करेंगे।
English explanation
AI draft: The Lord knows his servant’s suffering; he will dispel this terrible calamity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानत | जानते हैं | knows |
| जन | सेवक; भक्त | servant; devotee |
| की | की | of; possessive marker |
| पीर | पीड़ा | suffering |
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| भंजिहि | दूर करेंगे; नष्ट करेंगे | will dispel; will destroy |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| बिपति | विपत्ति | calamity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- सोरठा 184
- स्रोत अभिलेख
- 1.184
- सहायक विषय
- रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
- मुद्रित पृष्ठ
- 184, 185
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।