बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
मूल पाठ
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥४॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीसीतारामजीके गुणसमूहरूपी पवित्र वनमें विहार करनेवाले, विशुद्ध विज्ञानसम्पन्न कवीश्वर श्रीवाल्मीकिजी और कपीश्वर श्रीहनुमान्जीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 17 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।
English explanation
To the two who roam the sacred forest of Sita’s and Rama’s manifold virtues—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ | सीता-राम के गुणसमूह रूपी पवित्र वन में विचरने वाले दोनों | the two roaming the sacred forest of Sita’s and Rama’s manifold virtues |
2वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥४॥
English explanation
I bow to Valmiki, lord of poets, and Hanuman, lord among monkeys, both possessing pure knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वन्दे | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| विशुद्धविज्ञानौ | विशुद्ध ज्ञान वाले दोनों | the two possessing pure knowledge |
| कवीश्वरकपीश्वरौ | कवियों के स्वामी वाल्मीकि और वानरों के स्वामी हनुमान को | to Valmiki, lord of poets, and Hanuman, lord among monkeys |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 17
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।