बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
मूल पाठ
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥५॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादउत्पत्ति, स्थिति (पालन) और संहार करनेवाली, क्लेशोंकी हरनेवाली तथा सम्पूर्ण कल्याणोंकी करनेवाली श्रीरामचन्द्रजीकी प्रियतमा श्रीसीताजीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 18 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्।
English explanation
To her who brings about creation, preservation, and dissolution, and removes afflictions—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं | उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली को | to her who effects creation, preservation, and dissolution |
| क्लेशहारिणीम् | क्लेश दूर करने वाली को | to her who removes afflictions |
2सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्॥५॥
English explanation
I bow to Sita, Rama’s beloved, who brings every blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर्वश्रेयस्करीं | सब प्रकार का कल्याण करने वाली को | to her who brings every blessing |
| सीतां | सीता को | to Sita |
| नतोऽहं | मैं नत हूँ | I bow |
| रामवल्लभाम् | राम की प्रिया को | to Rama’s beloved |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 18
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।