बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा
मूल पाठ
यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा
यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।
यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां
वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥६॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी मायाके वशीभूत सम्पूर्ण विश्व, ब्रह्मादि देवता और असुर हैं, जिनकी सत्तासे रस्सीमें सर्पके भ्रमकी भाँति यह सारा दृश्य-जगत् सत्य ही प्रतीत होता है और जिनके केवल चरण ही भवसागरसे तरनेकी इच्छावालोंके लिये एकमात्र नौका हैं, उन समस्त कारणोंसे पर (सब कारणोंके कारण और सबसे श्रेष्ठ) राम कहानेवाले भगवान् हरिकी मैं वन्दना करता हूँ॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 18 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1यन्मायावशवर्ति विश्वमखिलं ब्रह्मादिदेवासुरा
English explanation
Under whose illusion-power the entire universe, and gods beginning with Brahma as well as demons, remain—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यन्मायावशवर्ति | जिनकी माया के अधीन रहने वाला | subject to whose illusion-power |
| विश्वमखिलं | समस्त विश्व | the entire universe |
| ब्रह्मादिदेवासुरा | ब्रह्मा आदि देवता और असुर | gods beginning with Brahma, and demons |
2यत्सत्त्वादमृषैव भाति सकलं रज्जौ यथाहेर्भ्रमः।
English explanation
Through whose existence all this appears real, like the illusion of a snake in a rope.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यत्सत्त्वादमृषैव | जिनकी सत्ता से सत्य-सा ही | through whose existence, as though real |
| भाति | दिखाई देता है | appears |
| सकलं | सब कुछ | everything |
| रज्जौ | रस्सी में | in a rope |
| यथाहेर्भ्रमः | जैसे साँप का भ्रम | like the illusion of a snake |
3यत्पादप्लवमेकमेव हि भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां
English explanation
Whose feet alone are the boat for those wishing to cross the ocean of worldly existence—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यत्पादप्लवमेकमेव | जिनके चरण रूपी नौका ही एकमात्र | whose feet alone are the sole boat |
| हि | निश्चय ही | indeed |
| भवाम्भोधेस्तितीर्षावतां | संसार-सागर को पार करने के इच्छुकों के लिए | for those wishing to cross the ocean of worldly existence |
4वन्देऽहं तमशेषकारणपरं रामाख्यमीशं हरिम्॥६॥
English explanation
I bow to that Lord Hari, called Rama, who is beyond all causes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वन्देऽहं | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| तमशेषकारणपरं | उनको, जो सभी कारणों से परे हैं | to him who is beyond all causes |
| रामाख्यमीशं | राम नाम वाले प्रभु को | to the Lord called Rama |
| हरिम् | हरि को, भगवान विष्णु को | to Hari, Lord Vishnu |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 18
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।